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विद्यार्थी का लक्ष्य -

किसी अच्छे ऊँचे लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयास निरन्तर करते रहना चाहिये, तभी हम सफल होते हैं। जैसे कोई विद्यार्थी किसी लक्ष्य को लेकर अभ्यास करता है वह डॉक्टर बनना चाहता है, इंजीनियर या प्रोफेसर या आई.पी.एस. की परीक्षा पास कर कलेक्टर। वह उसी प्रकार प्रयत्न कर लेता है, जबकि कुछ विद्यार्थी विभिन्न दिशाओं में अपना भाग्य अजमाने का प्रयत्न करते रहते हैं। पहले प्रकार के विद्यार्थी अपने मन को जीतकर एक दिशा में आगे बढते हैं और दूसरे प्रकार के विद्यार्थी अपने मन के वश में होकर कभी कुछ और कभी कुछ विषय को चुनते रहते है। माता-पिता को ध्यान देना चाहिये कि वे अपने बच्चे की हर इच्छा को निरन्तर पूरी करने के द्वारा उसमें यह प्रवृत्ति जागृत न करे कि आगे जाकर भी उसे दुःख ही उठाना पड़ेगा, क्योंकि भविष्य में न तो समय एक-सा रहता है और न सामर्थ्य। फिर एक ही बच्चा हो, तो बात अलग। कई भाई-बहन होने पर किसी एक को लाड़ करना और दूसरों की उपेक्षा करना बहुत बड़ी मानसिक उलझनें पैदा कर देता है। यह भी ध्यान में रखना चाहिए। बहन, भाईयों में आपस में ईर्ष्या नहीं पनपना चाहिए। मन के वश न होकर मन को जीतकर एक लक्ष्य की ओर ध्यान देना आवश्यक है।

We must constantly strive to achieve a noble and lofty goal; only then will we succeed. For example, a student practices with a goal in mind: he wants to become a doctor, an engineer, a professor, or a collector by passing the IPS exam. He strives accordingly, while some students try their luck in various fields.

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