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माँ का दर्जा -

गाय की सम्पदा हमारे पास उपलब्ध है जिसे हम पवित्र मानते हैं एवं माँ का दर्जा दिये हुये हैं। मगर इस मामले में भी स्थिति शर्मनाक है। पूजा करते समय ही पवित्र गाय की याद आती है वर्ना तो हम इसे एक फालतू जानवर ही समझते हैं। अगर हम सही ध्यान देते तो हमारी गाय सड़कों पर भटकने वाला एक आवारा पशु नहीं मानी जाती बल्कि एक उच्च दुग्ध उत्पादक सम्मानीय मवेशी होती। गौ-वंश की इतनी खराब हालत कुछ सालों में नहीं हुयी है और इसके लिये सिर्फ आधुनिकीकरण को ही जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। आज लोग घरों में कुत्ते-बिल्ली पालने में अपना जीवनस्तर ऊँचा उठा मानते हैं किन्तु गाय पालना शान के खिलाफ समझते हैं।
अब समय आ गया है कि गाय, गौशालाओं के परकोटे से निकलकर घर-आंगन में अपना स्थान बनाये। घरों में बनने वाली पहली रोटी गाय को फिर से मिलने लग जाये। गौ-हत्या पर पूर्णतः प्रतिबंध लगे एवं गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने के लिये जनमानस एक मन से उठ खड़ा हो जाये।

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  • माँ का दर्जा

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